कौन बनेगा उदयपुर UIT का चेयरमेन – भाईसाहब की तूती बोलेगी या मैडम की होगी महरबानी

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Gulab chand katariaउदयपुर। मल मॉस समाप्त होते ही राजनैतिक नियुक्तियां होना शुरु हो गई है, सोमवार को उदयपुर के अलावा अन्य नगर न्यास सुधार और विभिन्न बोर्ड के अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है। उदयपुर शहर के लिए भी यूआईटी चेयरमेन की घोषणा भी जल्दी होने वाली है उसके लिए जोड़तोड़ शुरू हो गयी है। भाजपा में दिग्गाझों की नज़र अब यूआईटी की खाली पड़ी कुर्सी पर है। जिस पर भाईसाहब की कृपा से कोई बैठता है या मेडम सीधा अपना फरमान जारी करती है।
यूआईटी चेयरमेन के लिए मेवाड़ के कद्दावार नेता गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की गुड बुक से कोई नाम निकलेगा या मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी गुड बुक में पहले ही तय कर रखा है। हालांकि इससे पहले भाजपा के शिव किशोर सनाढ्य की नियुक्ति में जलसंसाधन मंत्री किरण माहेश्वरी का दाव लगा था और उस वक़्त किरण महेशवरी की मुख्यमंत्री से निकटता अधिक थी।
जाती का समीकर होगा या गुटबाजी चलेगी :
भाजपा नेताओं की माने तो यूआईटी चेयरमेन के लिए अगर मेवाड़ की गुट बाजी हावी होती है, तो वसुंधरा गुटबाजी को बढ़ावा ना देते हुए अपना निर्णय सुनाएगी। और अगर श्री कटारिया का दखल रहता है तो कटारिया बेदाग़ छवि और जाती के आधार पर यूआईटी चेयरमेन का चुनाव कर सकते है।
जैन समाज का चेयरमेन विरोध का कारण बन सकता है क्यूंकि विधायक और महापौर दोनों जैन है। इसके अलावा पार्टी में भी जैन पदाधिकारियों का दबदबा है। इसको देखते हुए जैन समाज का चेयरमेन बनाना शायद मुश्किल है। राजपूत ब्राहमण या ओबीसी में से किसी अनुभवी और बेदाग़ छवि वाले को यह पद दिया जा सकता है।
दावेदारों की दौड़ शुरू :
भाजपा में चर्चा गर्म है कि भाईसाहब के उदयपुर आते ही भाजपा कार्यालय में दिग्गज भापाइयों और पदाधिकारियों की लाइन लग जाती है। उनकी दिन भर दौड़ शुरू हो जाती है भाजपा कार्यालय से लगाकर भाईसाहब के विभिन्न कार्यक्रमों तक। जिस दिन भाईसाहब उदयपुर में होते है सुबह से भाजपा कार्यालय में भाईसाहब का इंतज़ार में दिग्गज लगे रहते है, इस आस में की भाईसाहब आजाये और एक बार रामा-सामी हो जाए। हालांकि कोई भी दिग्गज अपनी मंशा जाहिर नहीं करता लेकिन यह भी तय है कि कब भाईसाहब की नज़र किस पर पढ़ जाए और यूआईटी की सीट उसको मिल जाए। और यूआईटी चेयरमेन नहीं तो ट्रस्टी के लिए ही भाईसाहब अपना मन बना लें। कुछ नहीं तो जिले की कार्यकारणी में ही कही जगह मिल जाय।
शक्तावत, कानावत या टांक :
भाजपा के राजनीति गलियारों में इन दिनों तिन नामों पे खासी चर्चा है। प्रेम सिंह शक्तावत जो की गुलाबचंद कटारिया की गुड बुक में है। बीएस कानावत जिन्होंने अपने चेयरमेन शिप के लिए दिल्ली तक जुगाड़ लगा रखा है। अगर ओबीसी को यह सीट दी जाती है तो जीएस टांक का नाम सबसे ऊपर है। इन तीनों नामों में प्रेम सिंह शक्तावत सबसे दमदार दावेदार माने जा रहे है। जो जाती और अपनी छवि के आधार पर अपना दावा मजबूत कर रहे है। सबसे मुख्य बात की गुलाबचंद कटारिया की गुडबुक में सबसे ऊपर प्रेम सिंह शक्तावत का ही नाम है। इन तीन के अलावा प्रमोद सामर का नाम भी यूआईटी चेयरमेन के लिए लिया जारहा था लेकिन पंचायती चुनाव में शंकरलाल के लाखो रुपये हड़पने के आरोप के बाद प्रमोद सामर को अब इस सूचि से बाहर हो गए है। हालांकि यह भी माना जारहा था की प्रमोद सामर के नाम पर कही ना कहीं गुलाब्चाद कटारिया को भी आपत्ति थी फिर चाहे वह जाती के आधार पर हो या पार्टी के अंदरूनी मामले को लेकर हो। इन सबके बीच कई अनुभवी भाजपाई यह भी कहते है कि यूआईटी चेयरमेन के नाम की घोषणा सबको चोंकाने वाली भी हो सकती है क्यूंकि अगर मैडम खुद इस पर निर्णय लेंगी तो कोई नया नाम भी सामने आसकता है जिसके बारे में किसी ने अभी तक सोचा भी नहीं है।

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