उदयपुर. गहलोत सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिकाओं में मनोनीत पार्षदों का मनोनयन वसुंधरा सरकार ने निरस्त कर दिया है। स्वायत्त शासन विभाग ने इसका आदेश जारी कर दिया है। स्वायत्त शासन विभाग के शासन उप सचिव की ओर से आदेश में कहा गया है कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 6 की उप धारा (1) के खंड (क) में प्रदत्त शक्तियों के तहत राज्य के सभी निकायों के सहवृत सदस्यों का मनोनयन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
विभाग के क्षेत्रीय उपनिदेशक दिनेश कोठारी ने बताया कि आदेश की कॉपी सभी संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। गौरतलब है कि गहलोत सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश के साथ ही उदयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता भरत आमेटा, बाबूलाल घावरी, राजेश जैन, डॉ. अब्दुल सलाम व कैलाश साहू को नगर परिषद (अभी नगर निगम) में सहवृत पार्षद मनोनीत किया था।
भाजपा कार्यकर्ताओं को निगम में मिल सकता है मौका : पिछली सरकार के कार्यकाल में मनोनीत सहवृत पार्षदों को हटाए जाने से अब स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं को नगर निगम में सहवृत पार्षद बनने का मौका मिल सकता है। पालिका चुनाव नवंबर में होने हैं। इससे पहले विधायक चुने गए फूलसिंह मीणा पार्षद से इस्तीफा दे चुके हैं।