बेबस माँ बेसुध बेटा

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पुलिस की पीटाई से युवक हुआ पागल

पुलिस यातना में खिलाया था मल, अब वह रोज खाता है

निर्धन परिवार को सताता रहता है पुलिस का  खौफ 

उदयपुर, । उस मां के दर्द की इंतेहा क्या होगी जिसका बेटा उसकी आंखों के सामने पिछले आठ सालों से ’’मल’’ खाता हो, जंजीरो में जकडा हो खुद अपने अपने सारे दांत तोड दिये हो। और इन सब की वजह एक छोटे से अपराध मे निर्दयता से पुलिस द्वारा की गई पिटाई।

अमल का कांटा सूरजपोल थाने के पिछे सत्यनारायण मार्ग पर रहने वाली ज्योति शर्मा जब अपनी आप बिती सुनाती है तो पल पल उसकी आंखे छलक उठती है। भरे पूरे मौहल्ले में खण्डहरनुमा मकान उसकी आप बिती खुद बंया करती है।

ज्योति शर्मा रूंधे गले से बताती है कि उसका जवाब बैठा मनीष शर्मा एक वत्त* खाना खाता है और एक वत्त* ’मल’ खाता है।

उसका कसूर इतना था कि आठ साल पहले उसने गलत संगत की वजह से भांग,गांजे की लत का शिकार हो गया था उसी लत मे एक बार बहक कर उसने एक सूरजपोल के बर्तन व्यवसायी की लडकी को छेड दिया। उस व्यवसायी ने अपने रूतबे और पैसे के बल पर पुलिस से शिकायत कर उसे सबक सिखाने के लिए कहा । पुलिस ने भी व्यापारी के रूतबे और पैसे को देखते हुए व्यापारी को खुश करने के लिए मनीष को जबरन थाने में ले लाकर अपनी हैवानियत का ऐसा सबुत दिया के अच्छे खासे इंसान को पागल बना दिया। ज्योति शर्मा पुलिस पर आरोप लगाती है कि पुलिस वालों ने मेरे बेटे को रात भर पीटा जब सुबह मुझे पता चला और में अपने बेटे से मिलने गयी तो मेरा बेटा मानसिक सतुंलन खो चुका था पुरे जिस्म पर जगह-जगह मार के निशान थे और पैरो में जख्म इतने गहरे थे कि वे आज भी नासूर बने हुए है।

ज्योति शर्मा ने बताया कि जब बेटे को मैने थाने में डांटा के तुझे शर्म नहीं आती क्यु किसी लडकी को छेडा तो उसने बस एक ही बात कहीं मां मै अपराधी हंू मेने लेट्रीन खाने जैसा काम किया है अब मुझे लेट्रीन ही खानी चाहिए। ये उस वत्त* ज्योति नहीं समझी लेकिन जब मनीष घर आया तो वह पागल हो चुका था और खाना नहीं खाता बस अपना मल खाता । यह देख ज्योति और उसके पति अपने होश खोये थे। जब उसको रोकते तो खुद को नुकसान पहुंचाता। ज्योति शर्मा बताती है कि बहुत इलाज करवाया काप*ी पैसा खर्च हुआ करीब २०बार इलेक्ट्रिक शॉक भी लगवा चुके है लेकिन कोई प*ायदा नहीं हुआ। ज्योति कहती है कि इसको रोकते है तो खुद को नुकसान पहुंचाता है इसने एक एक एक करके सारे दांत भी तोड लिए है। वह किसी और को नुकसान नही पहुंचाये इसलिए उसको जंजीरो में जकडा हुआ है। मां अपने दिल पर पत्थर रख कर उसको मल खाते देखती है। वो जिंदा रहे उसका बेटा इस दुनिया में रहे उसके लिए उसने उसे कोठारीनुमा कमरे के बाहर ही शोच की व्यवस्था की है। मां भर्रायी आवाज में कहती है कि मेरा बेटा सेंट ग्रेग्रोरियस स्कूल में १० वीं तक ७५ प्रतिशत अंको से पास हुआ है। लेकिन आज इसकी यह हालत है।

पुलिस से इतनी डरी हुई है कि कहती है ’’नहीं आप कहीं मत छापना वरना चौधरी मुझे जीने नहीं देगा।’’ ज्योति शर्मा पुलिस के दो कर्मियों पर आरोप लगाती है एक रोहिताश चौधरी जो अभी भी यही मकान के सामने रहता है। दूसरे का नाम वह भूल गयी। ज्योति ने कहा कि अपना गुजारा कुछ कपडे सिलाई करके करती हंू और उसके पति बरसो तक अपने बेटे की ऐसी हालत देख के होश खोये रहे। वह बस दिन रात उसको पथरायी आंखो से देखते रहते अभी पिछले एक साल से वेल्डिंग का कार्य करने लगे है। ज्योति बताती है कि उसका एक बडा बेटा और है। प्रशान्त शर्मा जो की अब घर में नही रहता है। ना ही कभी आता है वह भी वेल्डिंग का कार्य करता है। अब ज्योति शर्मा को ना तो किसी की मदद की आस है ना ही भगवान के चमत्कार की बस अगर है तो दिल मे बेटे का दर्द और पुलिस का डर।

 

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